पवित्र आत्मा परमेश्वर की प्रतिज्ञा थी
यीशु मसीह ने पवित्र आत्मा को पिता की प्रतिज्ञा बताया। यह अध्याय बताता है कि यह प्रतिज्ञा क्यों आवश्यक थी और विश्वासी के जीवन में इसका क्या महत्व है।
HINDI – SERIES 2 | सामर्थ्य, उद्देश्य और प्रतिज्ञा
Rev. Sarvjeet Herbert (Nayi Srishti नई सृष्टि)
2/2/20261 min read
नई सृष्टि के इस संदेश में हम समझेंगे कि परमेश्वर सृष्टिकर्ता है और उसने हमारी सृष्टि की है। वह हमारी सृष्टि को जानता है कि हम एक आत्मिक प्राणी हैं—अर्थात हम एक आत्मा हैं, हमारे पास प्राण है, और हम इस शरीर में रहते हैं।
इस संसार में मनुष्य दो दशा में रहता है—एक पहले आदम की दशा और एक दूसरे आदम की दशा। बाइबिल में लिखा है कि पहले आदम में सभी मरते हैं। यह मृत्यु पाप को दिखाती है क्योंकि मृत्यु मनुष्य के जीवन को परमेश्वर से अलग कर देती है। और दूसरा आदम प्रभु यीशु मसीह की दशा है, जिसमें हम एक नई सृष्टि बन जाते हैं। इस नई सृष्टि में हमारे जीवन में जो सबसे मुख्य कार्य करता है वह है पवित्र आत्मा।
पवित्र आत्मा कौन है?
जब हम पवित्र आत्मा की चर्चा करते हैं या पवित्र आत्मा के बारे में सुनते हैं तो हम सोचते हैं कि यह हमारे लिए नहीं है, यह किसी और समुदाय के लिए है या किसी और समूह के लिए है। लेकिन बाइबिल हमें बहुत स्पष्ट रूप से दिखाती है कि पवित्र आत्मा का कार्य हम प्रभु यीशु मसीह के जीवन में देख सकते हैं।
यीशु मसीह एक संपूर्ण मानव बनकर इस पृथ्वी पर अपने जीवन को जिए और सारी मानवता के लिए एक आदर्श दिखाया। प्रभु यीशु मसीह ने इस पृथ्वी पर मानव के लिए उद्धार का कार्य किया। इसलिए प्रभु यीशु मसीह को हम मुक्तिदाता कहते हैं। यीशु के नाम का अर्थ ही मुक्तिदाता है।
जब भी हम पूरी बाइबिल में, विशेषकर मत्ती, मरकुस, लूका और यहुन्ना में प्रभु यीशु मसीह के जीवन के बारे में पढ़ते हैं—कि यीशु मसीह का जन्म कैसे हुआ, यीशु मसीह ने क्या-क्या कार्य किया, यीशु मसीह ने कैसे क्रूस की मृत्यु को सहा, वह क्रूस पर मारे गए, गाड़े गए और मरकर जिंदा हुए—तो इन सारे कार्यों में प्रभु यीशु मसीह के साथ पवित्र आत्मा का कार्य होता रहा।
प्रेरितों के काम में पवित्र आत्मा का प्रकाशन
यह पवित्र आत्मा कौन है जो प्रभु यीशु मसीह के जीवन में अपने कार्यों को करता रहा? इसके लिए हमें प्रेरितों के काम में जाना होगा। वास्तव में पवित्र आत्मा स्वयं परमेश्वर है। परमेश्वर आत्मा है और पवित्र आत्मा परमेश्वर का आत्मा है।
जब प्रेरितों की पुस्तक लिखी गई तो एक चिकित्सक थे जिन्होंने सारे तथ्यों को जो कुछ भी प्रभु यीशु मसीह के द्वारा इस संसार में घटा—प्रभु यीशु मसीह की सारी जीवनी को, उनके सारे कार्यों को, उनकी सारी शिक्षाओं को—सबका अध्ययन किया। सारी बातों को उन्होंने जांचा-परखा और सत्यापित किया। तब उन्होंने प्रेरितों के काम नामक पुस्तक को लिखा।
इस पुस्तक में प्रेरितों के काम के पहले अध्याय के पहले पद से चौथे पद तक यह लिखा है: "मैंने पहली पुस्तक उन सब बातों के विषय में लिखी जो यीशु आरंभ से करता और सिखाता रहा, उस दिन तक जब तक वह उन प्रेरितों को जिन्हें उसने चुना था, पवित्र आत्मा के द्वारा आज्ञा देकर ऊपर उठाया न गया। और उसने दुख उठाने के बाद बहुत से पक्के प्रमाणों से अपने आप को उन्हें जीवित दिखाया, और 40 दिन तक वह उन्हें दिखाई देता रहा, और परमेश्वर के राज्य की बातें करता रहा। और उनसे मिलकर उन्हें आज्ञा दी कि यरूशलेम को न छोड़ो, परन्तु पिता की उस प्रतिज्ञा के पूरे होने की बाट जोहते रहो जिसकी चर्चा तुम मुझसे सुन चुके हो।"
यीशु मसीह के जीवन में पवित्र आत्मा की सामर्थ्य
इन पदों में हम देखते हैं कि यीशु मसीह ने अपने जीवनकाल में सारे कार्यों को पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से किया। और जब प्रभु यीशु मसीह मरकर जिंदा हुए तब भी वह पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से आज्ञा दे रहे हैं। यीशु मसीह का जन्म, यीशु मसीह का जीवनकाल, उनकी सेवाएं, यीशु मसीह की मृत्यु, उनका पुनरुत्थान और उनका स्वर्गारोहण—सारे कार्यों में, सारी बातों में यीशु मसीह के साथ पवित्र आत्मा का कार्य हम देखते हैं।
यह घटना उस समय की है जब प्रभु यीशु मसीह मरकर जीवित हुए और अपने चेलों को दिखाई दिए। अंतिम समय में, जब तक पृथ्वी पर प्रभु यीशु मसीह का समय था, तब तक उन्होंने पवित्र आत्मा की सहायता ली—अर्थात पवित्र आत्मा के द्वारा उन्होंने अपने चेलों को आज्ञा दी, और फिर वे स्वर्ग में उठा लिए गए।
परमेश्वर पिता की प्रतिज्ञा
जब हम चौथे पद में आते हैं तो यहां लिखा है कि प्रभु यीशु मसीह ने कौन सी आज्ञा अपने चेलों को दी। वह कौन सी इतनी महत्वपूर्ण आज्ञा थी जो पवित्र आत्मा के द्वारा उन्होंने अपने प्रेरितों को दी? जब वह अपने चेलों के सामने देखते-देखते बादलों में स्वर्ग में उठा लिए गए, तब वह जो आज्ञा दे रहे हैं उसे एक प्रतिज्ञा से जोड़ रहे हैं।
अर्थात प्रभु यीशु मसीह पिता द्वारा दी गई प्रतिज्ञा, एक वायदे को याद दिला रहे हैं। प्रतिज्ञा का अर्थ वायदा होता है। यह वायदा जो परमेश्वर पिता ने किया—प्रभु यीशु मसीह का पिता आज हमारा भी पिता है, वह परमेश्वर एक ही है—वह सारे मनुष्यों का सृष्टिकर्ता है।
उस पिता ने इस पृथ्वी पर सारे पुराने नियम के समय में कार्य किया। लेकिन पुराने नियम में, Old Testament में, जो यहूदियों के साथ घटा, उस सारे समय में पिता ने इस पृथ्वी पर कार्य किया और विशेषकर यहूदियों के बीच कार्य करता रहा, जिसके द्वारा हमें पुरानी व्यवस्था अर्थात पुराना नियम मिला है।
योएल की भविष्यवाणी
यहां पर प्रभु यीशु मसीह एक वायदे को बता रहे हैं, एक प्रतिज्ञा के बारे में बता रहे हैं—एक वायदा जो परमेश्वर पिता ने यहूदियों से किया था, अर्थात सारी मानवजाति के लिए किया था। वह प्रतिज्ञा क्या है?
यह प्रतिज्ञा हमें पुराने नियम के योएल नामक पुस्तक के दूसरे अध्याय के 28वें पद में मिलती है, जहां परमेश्वर पिता यह कहते हैं: "मैं अंत के समय में अपना आत्मा सारे प्राणियों पर उंडेलूंगा।"
परमेश्वर पिता ने योएल 2:28 में सारी मानवता के लिए एक प्रतिज्ञा की, एक वायदा किया, और परमेश्वर ने कहा कि अंत के समय में—आज हम अंत के समय में रह रहे हैं, यह अनुग्रह का युग है—परमेश्वर पिता आज के इस युग के लिए कहता है, "मैं अंत के समय में सारे प्राणियों के ऊपर अपना आत्मा उंडेलूंगा। तुम्हारे बेटे और बेटियां भविष्यवाणी करेंगे, तुम्हारे बूढ़े स्वप्न देखेंगे, तुम्हारे जवान दर्शन देखेंगे, और तुम्हारे दास और दासियों पर भी मैं अपना आत्मा उंडेलूंगा।"
परमेश्वर का सिद्धांत: पहले वचन, फिर कार्य
परमेश्वर जो भी कार्य करता है उसका यह एक सिद्धांत है, एक नियम है कि वह अपने कार्यों को इस पृथ्वी पर करने से पहले बोलता है, जिसे हम कहते हैं कि वह प्रतिज्ञा देता है।
यीशु मसीह अपने चेलों को यह बता रहे हैं कि देखो, मेरे विषय में जो भी लिखा था, मैंने सारे कार्यों को क्रूस पर पूरा कर दिया है। यीशु मसीह के कार्य मनुष्यजाति को मुक्ति दिलाने के थे—पापों से मुक्ति, मोक्ष, अनंत जीवन दिलाने का था—और उस कार्य को प्रभु यीशु मसीह ने पूर्णतः क्रूस पर किया। वे मारे गए और मरकर वे जिंदा हो गए।
आत्मिक मनन
लेकिन अब वह यह बता रहे हैं कि देखो, मैं तो चला जाऊंगा लेकिन इस पृथ्वी पर तुम रह जाओगे, इसलिए मैं तुम्हें अनाथ नहीं छोडूंगा। अकेला नहीं छोडूंगा। तुम्हारे लिए पिता ने एक व्यवस्था कर रखी है, एक प्रावधान दिया है।
परमेश्वर की प्रतिज्ञा विश्वासयोग्य है। जो उसने कहा, वह पूरा करता है। जिस प्रकार उसने पुराने नियम में पवित्र आत्मा को भेजने की प्रतिज्ञा की, उसी प्रकार वह अपने वचन पर स्थिर रहा।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
उस वायदे को अपने चेलों को याद दिलाकर यीशु मसीह कह रहे हैं कि मैं अपना आत्मा अर्थात पवित्र आत्मा तुम्हारे बीच में उंडेल दूंगा। यह प्रतिज्ञा केवल चेलों के लिए नहीं थी, बल्कि सारी मानवता के लिए थी। आज भी हर वह व्यक्ति जो यीशु मसीह पर विश्वास करता है, उसके जीवन में पवित्र आत्मा का यह कार्य जारी है।
आज हम अनुग्रह के युग में जी रहे हैं जहां पवित्र आत्मा उंडेला गया है। यह प्रतिज्ञा हमारे लिए भी है। हम अनाथ नहीं छोड़े गए हैं। पवित्र आत्मा हमारे साथ है, हमारे अंदर है, और हमें नई सृष्टि में परिवर्तित कर रहा है।

