पवित्र आत्मा का बोध का कार्य
पवित्र आत्मा का बोध का कार्य मनुष्य के हृदय में पाप, धार्मिकता और न्याय को प्रकट करता है, जिससे वह सत्य को पहचाने और परमेश्वर की ओर लौटे।
HINDI – SERIES 2 | सामर्थ्य, उद्देश्य और प्रतिज्ञा
Rev. Sarvjeet Herbert (Nayi Srishti नई सृष्टि)
2/2/20261 min read
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प्रभु यीशु मसीह अपने सेवाकाल के अंतिम समय में अपने चेलों से बता रहे हैं कि मैं अपने भेजनेवाले के पास अब वापस जाने पर हूं। जिस कार्य के लिए परमेश्वर ने मुझे इस पृथ्वी पर भेजा था उसे मैं क्रूस के द्वारा पूरा करूंगा, दुख को उठाऊंगा, और तीसरे दिन मरकर जिंदा होऊंगा। और फिर मैं पिता के पास चला जाऊंगा।
यहुन्ना 16:5-11 में हम पढ़ते हैं: "अब मैं अपने भेजनेवाले के पास जाता हूं, और तुम में से कोई मुझसे नहीं पूछता कि तू कहां जाता है। परन्तु मैंने जो यह बातें तुमसे कही हैं, इसलिए तुम्हारा मन शोक से भर गया है। तौभी मैं तुमसे सच कहता हूं कि मेरा जाना तुम्हारे लिए अच्छा है, क्योंकि यदि मैं न जाऊं तो वह सहायक तुम्हारे पास न आएगा। परन्तु यदि मैं जाऊंगा तो उसे तुम्हारे पास भेज दूंगा। और वह आकर संसार को पाप और धार्मिकता और न्याय के विषय में बोध कराएगा।"
यीशु मसीह का जाना क्यों आवश्यक था?
चेलों का मन बहुत शोकित हो गया था, दुखित हो गया था क्योंकि वे इतने वर्षों तक प्रभु यीशु मसीह के साथ रहे थे। यीशु मसीह के साथ उन्होंने कार्यों को देखा, सीखा, परमेश्वर के राज्य की बाट जोह रहे थे। और प्रभु यीशु मसीह कह रहे हैं कि मैं अपने भेजनेवाले के पास चला जा रहा हूं।
लेकिन प्रभु यीशु मसीह उनके शोक को दूर करने के लिए पवित्र आत्मा की चर्चा कर रहे हैं और यह बता रहे हैं कि यह पवित्र आत्मा जो मैं पिता के पास से भेजूंगा, वह तुम्हारे साथ घनिष्ठ संगति देगा। अर्थात इतनी घनिष्ठ संगति जो एक मनुष्य दूसरे मनुष्य को नहीं दे सकता, वह पवित्र आत्मा तुम्हारी आत्मा के साथ देगा। मेरा जाना बहुत आवश्यक है क्योंकि यदि मैं जाऊंगा तभी वह पवित्र आत्मा तुम्हारे पास आएगा।
तीन मुख्य प्रश्न जो मनुष्य को सताते हैं
प्रभु यीशु मसीह तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं को अपने चेलों के साथ छू रहे हैं। वह केवल उन्हीं के लिए नहीं, परन्तु आज संसार के लिए, आगे आने वाले हर एक प्राणी के लिए। जब तक प्रभु यीशु मसीह दोबारा नहीं आते हैं, यह वचन वैसा ही लागू है कि जब पवित्र आत्मा आएगा तो वह जगत के मनुष्यों को तीन मुख्य प्रश्नों के प्रति बोध कराएगा, उन्हें आश्वस्त करेगा।
ये तीन प्रश्न हैं जो हर एक मनुष्य को सताते हैं, और वे प्रश्न हैं: पाप, धार्मिकता और न्याय। बाइबिल में बहुत स्पष्टता से लिखा है कि हर एक मनुष्य जो शरीर में जन्म लेगा वह शरीर में मरेगा, लेकिन उसके शरीर और आत्मा दोनों का न्याय होगा।
यह प्रश्न मनुष्य को जब वह अकेला होता है तो परेशान कर देते हैं। यीशु मसीह कह रहे हैं कि जब पवित्र आत्मा आएगा तो वह तुम्हें और सारे मनुष्यों को जो मेरे वचन को सुनेंगे, उन्हें एक सही उत्तर दे देगा।
पाप का बोध: अविश्वास का पाप
लिखा है, "पाप के विषय में इसलिए कि वे मुझ पर विश्वास नहीं करते।" हर एक व्यक्ति जो पहले आदम में जन्म लेता है, वह पहले आदम में जन्म लेता है। यह एक सच्चाई है और उस आदम के पाप का फल हर एक के जीवन में आता है।
पौलुस ने इसे बहुत स्पष्टता से बताया है कि "सब ने पाप किया और परमेश्वर की महिमा से रहित हो गए।" महिमा से रहित होने का अर्थ है कि उनके अंदर से परमेश्वर की महिमा, परमेश्वर की उपस्थिति अलग हो गई है। आज हर एक व्यक्ति के अंदर परमेश्वर नहीं है—यह एक सच्चाई है। लेकिन परमेश्वर यह चाहता है कि हर एक मनुष्य के अंदर वह आ जाए, हर एक मनुष्य का शरीर पवित्र आत्मा का मंदिर हो जाए। यह परमेश्वर का कार्य है जिसे पवित्र आत्मा पूरा करता है।
यीशु मसीह: पाप से छुड़ानेवाला
आदम के कारण जो मनुष्य के अंदर पाप आया, उस पाप के दंड को किसी और ने उठा लिया। पाप से छुड़ाने का उपाय प्रभु यीशु मसीह ने क्रूस पर कर दिया। और इसीलिए परमेश्वर ने अपने पुत्र यीशु मसीह को इस संसार में भेजा।
यूहन्ना 3:16 में लिखा है: "क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नाश न हो परन्तु अनंत जीवन पाए।" नाश होने का अर्थ है कि वह मृत्यु के वश में न जाए परन्तु अनंत जीवन को पा सके।
"परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिए नहीं भेजा कि जगत पर दंड की आज्ञा दे, परन्तु इसलिए कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए।" यीशु मसीह ने भी कहा कि मैं पापियों का नाश करने नहीं आया हूं, उन पर दंड की आज्ञा देने नहीं आया हूं, परन्तु उन्हें दंड की आज्ञा से बचाने आया हूं। यीशु मसीह इसलिए आए कि हम जो पापी थे वे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा बचा लिए जाएं।
यीशु मसीह का बलिदान
परमेश्वर का प्रभु यीशु मसीह को भेजने का यह उद्देश्य था, यह मिशन था कि वे मनुष्यजाति को, पहले आदम में जो मानवता है, उसके दंड की आज्ञा से बचा लें। और वे कैसे बचा सकते थे? उन्होंने उस दंड की आज्ञा को अपने ऊपर उठा लिया। सारी मानवता के पापों के लिए उन्होंने मृत्यु की सजा सह ली, जिसके द्वारा आज जगत यीशु मसीह के द्वारा उद्धार पा सकता है।
यूहन्ना 3:18 में लिखा है: "जो उस पर विश्वास करता है उसे दंड की आज्ञा नहीं होती।" क्या विश्वास करता है? यह विश्वास करता है कि जो दंड की आज्ञा मुझे मिलनी थी वह यीशु मसीह ने ले ली। यीशु मसीह ने हमारे पाप को अपने देह पर उठाकर क्रूस पर चढ़ गए कि हम पाप के लिए मरकर धार्मिकता के लिए जीवन पाएं।
विश्वास या अविश्वास: दो मार्ग
बहुत ही गंभीर शब्द आगे लिखा है: "परन्तु जो उस पर विश्वास नहीं करता वह दोषी ठहर चुका, इसलिए कि उसने परमेश्वर के पुत्र के नाम पर विश्वास नहीं किया।"
अंतिम समय में जब प्रभु यीशु मसीह न्याय करेंगे—और न्याय सभी का होगा, धर्मियों का भी होगा और अधर्मियों का भी होगा—धर्मी कौन है? जिन्होंने प्रभु यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता ग्रहण कर लिया है, उन पर दंड की आज्ञा नहीं है। लेकिन जिन्होंने प्रभु यीशु मसीह के उस बलिदान को अस्वीकार कर दिया, इस सच्चाई को अस्वीकार कर दिया कि प्रभु यीशु मसीह उनके लिए मारे गए, तो उन पर वह दंड की आज्ञा बनी हुई है।
आत्मिक मनन
इस दंड का परिणाम एक व्यक्ति को भुगतना पड़ेगा—वह यह होगा कि वह पाप से मुक्त नहीं हो पाया। यह नहीं कि उसने क्या किया है, कितने अच्छे कार्य किए हैं या कितने बुरे कार्य किए हैं, परन्तु जो न्याय होगा, अंतिम न्याय होगा, वह इस बात का होगा कि अमुक व्यक्ति ने यीशु मसीह पर विश्वास किया है, उसे उद्धारकर्ता माना है, या उसने विश्वास नहीं किया है और उस पर दंड की आज्ञा हो चुकी है।
अंतिम न्याय का मापदंड हमारे कर्म नहीं होंगे, बल्कि यह होगा कि हमने यीशु मसीह पर विश्वास किया या नहीं। यह सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
पवित्र आत्मा इस जगत में आकर इस बात के लिए मनुष्यों को बोध कराएगा—पाप के विषय में इसलिए कि उन्होंने यीशु मसीह पर विश्वास नहीं किया, कि प्रभु यीशु मसीह पापों से बचाने के लिए उद्धारकर्ता और मुक्तिदाता हैं।
आज पवित्र आत्मा आपके जीवन में कार्य कर रहा है। वह आपको पाप का बोध करा रहा है, लेकिन केवल दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि आपको यीशु मसीह की ओर ले जाने के लिए। यीशु मसीह पर विश्वास करें। उन्हें अपना उद्धारकर्ता स्वीकार करें। वे आपके पापों के लिए क्रूस पर मरे, और तीसरे दिन जी उठे। जो उन पर विश्वास करता है, उसे दंड की आज्ञा नहीं होती, परन्तु अनंत जीवन मिलता है।

