पवित्र आत्मा एक सांत्वनादाता है

पवित्र आत्मा एक सांत्वनादाता है जो दुख, भय और निराशा के समय विश्वासी के साथ रहता है और उसे परमेश्वर की शांति और आशा से भर देता है।

HINDI – SERIES 2 | सामर्थ्य, उद्देश्य और प्रतिज्ञा

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2/2/20261 min read

पवित्र आत्मा एक सांत्वनादाता है
पवित्र आत्मा एक सांत्वनादाता है

प्रेरितों की पुस्तक के पहले अध्याय से हम यीशु मसीह की पवित्र आत्मा के विषय में बातचीत को लेते हुए यूहन्ना 14:26 तक पहुंचे हैं, जहां इस प्रकार लिखा है: "परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा और जो कुछ मैंने तुमसे कहा है वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा।"

Amplified Bible में यह बहुत स्पष्टता से लिखा है: Comforter (Counselor, Helper, Intercessor, Advocate, Strengthener and Standby), the Holy Spirit, whom the Father will send in my name, in my place, to represent me and act on my behalf, He will teach you all things and He will cause you to recall, will remind you of and bring to your remembrance everything I have told you।

पवित्र आत्मा: हमारा सहायक

Amplified Bible में बहुत अच्छे से इसे परिभाषित किया गया है कि यह पवित्र आत्मा हमारा सहायक है। और वह पवित्र आत्मा किसके नाम से आएगा? यीशु मसीह यह कहते हैं कि जब मैं चला जाऊंगा तो वह सहायक जो आएगा वह मेरे नाम से आएगा।

और वह नाम क्या है—यीशु? यीशु एक ऐसी उपाधि है, एक ऐसा पद है जो मसीह को दिया गया, हमारे लिए दिया गया, मानवता के लिए दिया गया। स्वर्ग के नीचे, पृथ्वी के ऊपर, मनुष्यों के बीच और कोई दूसरा नाम नहीं है। इस नाम की बहुत गहराई है।

यीशु मसीह कहते हैं कि वह मेरे नाम से आएगा और क्या करेगा? वह सारी बातों को जो मैंने तुमसे कहीं, तुम्हारे साथ साढ़े तीन साल तक इस पृथ्वी पर रहकर जो कार्य किया, जो शिक्षाएं दीं, उन सारी बातों को याद दिलाएगा—He will bring you to remember।

पवित्र आत्मा: सदियों का साक्षी

आज हम कैसे उन बातों को जो दो हजार सोलह वर्ष पहले घटी हैं, जान जाते हैं? किस प्रकार हमारा हृदय परिवर्तित हो जाता है? हम क्यों विश्वास कर लेते हैं? हमने नहीं देखा यीशु मसीह को क्रूस पर मरते हुए, न हमारे दादा-परदादा या चौथी-पांचवीं पीढ़ी ने देखा।

लेकिन दो हजार सोलह वर्ष पहले एक साक्षी था, एक व्यक्ति था जिसका नाम पवित्र आत्मा है। और यीशु मसीह अपनी चर्चा में उनसे यही बता रहे हैं कि जब मैं चला जाऊंगा तो तुम और तुम्हारे बाद जितने भी लोग आएंगे, उन सारी बातों को जो मैंने इस पृथ्वी पर रहकर कहीं, वह याद दिलाएगा।

वह कहता है, "In my place"—मेरे स्थान पर आएगा। तो हम मसीह यीशु को कैसे अपने जीवन में रख सकते हैं, कैसे उससे जुड़ सकते हैं? यह कार्य पवित्र आत्मा का है। वह कहता है, "In my place, to represent me, on my behalf"—कितना महत्वपूर्ण कार्य यह व्यक्ति कर रहा है!

यह परमेश्वर का तीसरा व्यक्तित्व है जिसका नाम पवित्र आत्मा है। और यह पवित्र आत्मा परमेश्वर पिता से निकलकर यीशु मसीह के कार्यों को आज इस पृथ्वी पर कर रहा है। और यह बहुत अद्भुत है कि वह प्रभु यीशु मसीह के नाम से आ रहा है। यीशु मसीह के नाम में बहुत कुछ संभव है। जो बात मनुष्य के द्वारा असंभव है वह परमेश्वर के द्वारा संभव है, उसके नाम में।

नई सृष्टि और पवित्र आत्मा

आज जब हम प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास कर रहे हैं कि क्रूस पर यीशु मसीह ने सारी मानवता की एक नई रचना की—इफिसियों 2:10 में लिखा है, "We are the workmanship of God"—हम सब परमेश्वर के हाथों की बनाई हुई रचना हैं।

पहले परमेश्वर ने बाग-ए-अदन में आदम को मिट्टी से लेकर बनाया था। लेकिन जब वह रचना बिगड़ गई तब परमेश्वर ने अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह में, उस कलवरी के क्रूस के ऊपर, उसके शरीर के अंदर पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से एक नई सृष्टि की रचना की। और यही नई सृष्टि है जिसमें हर एक को आना है। यह एक नई मानवता है। पहला आदम एक मानवता था, लेकिन यह मानवता एक नई सृष्टि के रूप में प्रभु यीशु मसीह में आ गई।

जब हम नई सृष्टि बन जाते हैं, जैसा कि 2 कुरिन्थियों 5:17 में लिखा है कि "जो मसीह में है वह एक नई सृष्टि है," यह नई सृष्टि कैसे कार्य करती है? किसकी सहायता इसे प्रदान होती है? वह है पवित्र आत्मा।

पवित्र आत्मा का सतत कार्य

पवित्र आत्मा यीशु मसीह के जीवनकाल से लेकर मृत्यु, पुनरुत्थान, स्वर्गारोहण और राज्याभिषेक तक सारी बातों में साथ रहा, और वही पवित्र आत्मा आज हमारे बीच में है। उसने इस कलियुग को एक अनुग्रह का युग बना दिया है।

पवित्र आत्मा हर एक के जीवन में मसीह के किए हुए कार्यों को बताना चाहता है, मसीह की बातों को बताता है, उन्हें याद दिलाता है। जब हम परमेश्वर के वचन को पढ़ते हैं तो वह हमें उसका प्रकाशन देता है। यह ज्ञान नहीं है, यह प्रकाशन है जो मनुष्य की आत्मा में प्रकट होता है। हो सकता है बड़ी-बड़ी पुस्तकों को पढ़कर, बड़ी-बड़ी कक्षाओं में पढ़कर हम ज्ञान को हासिल कर लें।

लेकिन पवित्र आत्मा क्या करता है? पवित्र आत्मा हमारी आत्मा में परमेश्वर, उसके पुत्र प्रभु यीशु मसीह के किए हुए कार्यों को जो उसने हमारे जीवन में किए हैं, उन सारी बातों को प्रकट करता है, प्रकाशित करता है। तब हम उन सच्चाइयों को जान सकते हैं कि प्रभु यीशु मसीह ने कितना बड़ा बलिदान सारी मानवता के लिए कर दिया।

मसीह का महान बलिदान

और यह बलिदान एक साधारण बलिदान नहीं था, किसी एक मनुष्य का बलिदान नहीं था, लेकिन सारी मानवता का जो पहले आदम में थी, उस पापमय मानवता का बलिदान था। यीशु मसीह के निष्पाप, निष्कलंक शरीर के अंदर—अर्थात परमेश्वर ने मानवता के सारे पापों को यीशु मसीह के शरीर पर रखकर उसके ऊपर दंड की आज्ञा दे दी। और यह दंड की आज्ञा मृत्यु की आज्ञा थी, क्योंकि पाप की मजदूरी मृत्यु है, और परमेश्वर का वरदान सारी मानवता के लिए अनंत जीवन, मोक्ष है।

यह पवित्र आत्मा हमारी आत्मा को स्पर्श करता है, बताता है। इसलिए पवित्र आत्मा बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए प्रभु यीशु मसीह इसकी बार-बार अपने चेलों से चर्चा कर रहे हैं।

चेलों की शांति और हमारी शांति

चेले बहुत डरे हुए थे, घबराए हुए थे क्योंकि यीशु मसीह ने कह दिया था कि अब मैं तुम्हें छोड़कर जा रहा हूं। लेकिन उन्हें बड़ी शांति मिली जब प्रभु यीशु मसीह ने यह कहा कि मैं तुम्हारे बीच में फिर होऊंगा—शरीर में नहीं, लेकिन आत्मा में। पवित्र आत्मा आज हर एक यीशु मसीह पर विश्वास करने वाले के अंदर आकर रहता है और उसे सारी बातों को जो प्रभु यीशु मसीह ने बताईं, स्मरण कराता है।

हम यीशु मसीह को तभी जान सकते हैं जब हम पवित्र आत्मा को जानें। तो पवित्र आत्मा हमारे लिए, हर एक विश्वासी के लिए बहुत आवश्यक है।

आत्मिक मनन

कुलुस्सियों 3:16 में लिखा है: पौलुस कहते हैं कि "मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से भरें।" और जब हम परमेश्वर के वचन को, मसीह के वचन को अपनी आत्मा में भरते हैं, तब पवित्र आत्मा उन वचनों को खोलता है और उन वचनों की बातों को, भेदों को, उस रहस्य को जो परमेश्वर ने छिपाया नहीं है, वह हमारे जीवन में प्रकट करता है, याद दिलाता है, स्मरण में लाता है।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

पवित्र आत्मा हमारी सहायता करता है कि हम इस आत्मिक जीवन में अपनी सेवा में आगे बढ़ सकें। पवित्र आत्मा यीशु मसीह के नाम से आया है, यीशु मसीह के स्थान पर है, और यीशु मसीह की बातों को हमें स्मरण कराता है।

आज जब आप परमेश्वर के वचन को पढ़ें, तो पवित्र आत्मा से प्रार्थना करें कि वह आपको प्रकाशन दे। केवल ज्ञान नहीं, बल्कि आत्मिक प्रकाशन। पवित्र आत्मा आपको यीशु मसीह के महान बलिदान को समझाएगा, उनकी शिक्षाओं को स्मरण कराएगा, और आपके जीवन में मसीह की उपस्थिति को वास्तविक बनाएगा। पवित्र आत्मा को अपने जीवन में कार्य करने दें, और आप देखेंगे कि कैसे असंभव संभव हो जाता है।