पवित्र आत्मा हमें आज्ञा मानने में सहायता करता है

पवित्र आत्मा कैसे हमें परमेश्वर की आज्ञाओं को मानने और प्रेम की आज्ञा में चलने की सामर्थ देता है।

HINDI – SERIES 2 | सामर्थ्य, उद्देश्य और प्रतिज्ञा

Rev. Sarvjeet Herbert (Nayi Srishti नई सृष्टि)

2/2/20261 min read

पवित्र आत्मा और बाइबल आधारित शिक्षा
पवित्र आत्मा और बाइबल आधारित शिक्षा

प्रभु यीशु मसीह ने अपने चेलों से अपनी मृत्यु से पहले एक महत्वपूर्ण वार्तालाप किया था। उस वार्तालाप में उन्होंने पवित्र आत्मा के विषय में बहुत सी बातें बताईं। आज हम देखेंगे कि यह पवित्र आत्मा क्यों आवश्यक था और क्यों प्रभु यीशु मसीह ने कहा कि मैं जाऊंगा और पिता से विनती करूंगा कि वह तुम्हारे लिए पवित्र आत्मा भेजें।

यहुन्ना 14:15 में इसका उत्तर मिलता है: "यदि तुम मुझसे प्रेम रखते हो तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे।" यहां प्रभु यीशु मसीह New Covenant में उस महान आज्ञा के बारे में चर्चा कर रहे हैं जो प्रेम की आज्ञा है।

प्रेम की आज्ञा: सबसे बड़ी आज्ञा

मत्ती 22:37 में हम देखते हैं कि यीशु मसीह ने दस आज्ञाओं को संक्षेप में दो मुख्य आज्ञाओं में बताया, और इन आज्ञाओं का आधार प्रेम है। जब फरीसी और व्यवस्थापक यीशु मसीह के पास आकर पूछते हैं, "हे गुरु, व्यवस्था में कौन सी आज्ञा बड़ी है?" तो यीशु मसीह ने उनसे कहा, "तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है। और उसी के समान यह दूसरी भी है कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।"

याकूब 2:8 में इसे राज्य की आज्ञा कहा गया है। हम बहुत कुछ तोड़ सकते हैं लेकिन राज्य की आज्ञा नहीं तोड़ सकते।

मनुष्य की असमर्थता और पवित्र आत्मा का समाधान

प्रभु यीशु मसीह अपने चेलों को यह आज्ञा दे रहे हैं कि यदि तुम मुझसे प्रेम करते हो तो तुम्हें परमेश्वर से प्रेम करना होगा और अपने साथियों से भी प्रेम करना होगा। लेकिन सवाल यह है कि चेले कैसे प्रेम कर सकते हैं?

मनुष्य की रचना में पाप के प्रभाव के कारण आज मनुष्य परमेश्वर के स्वभाव से अलग हो गया है, और इसलिए उसके लिए असंभव है कि वह परमेश्वर से प्रेम कर सके और मनुष्य से भी प्रेम कर सके। इसलिए प्रभु यीशु मसीह कह रहे हैं कि जब पवित्र आत्मा आएगा तो वह इस प्रेम को तुम्हारे जीवन से बहने देगा।

रोमियों 5:5 में लिखा है कि "परमेश्वर का प्रेम पवित्र आत्मा के द्वारा तुम्हारे हृदय में डाला जाता है।" यह प्रेम वह तत्व है, वह सार है जो परमेश्वर का है। जब मनुष्य मुक्ति पाता है, उद्धार पाता है, तो पवित्र आत्मा के द्वारा परमेश्वर का प्रेम उसकी आत्मा में डाला जाता है।

पवित्र आत्मा की अत्यंत आवश्यकता

आज भी हमारे लिए यह पवित्र आत्मा अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिना इसके हम परमेश्वर के स्वभाव को नहीं पा सकते, बिना पवित्र आत्मा के हम परमेश्वर की आज्ञाओं को भी पूरा नहीं कर सकते। परमेश्वर ने दस आज्ञाएं दी हैं और वे आज भी लागू होती हैं। इन आज्ञाओं को मानने के लिए, विशेषकर राज्य की आज्ञा अर्थात प्रेम—यह हम बिना पवित्र आत्मा के नहीं कर सकते।

इसलिए पवित्र आत्मा की चर्चा करते हुए प्रभु यीशु मसीह बता रहे हैं कि यह तुम्हारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है, और इसीलिए मैं जाकर परमेश्वर पिता से विनती करूंगा कि वह तुम्हारे लिए अपना आत्मा भेजें जो तुम्हारे अंदर रहेगा, हर समय तुम्हारे साथ रहेगा—indwelling of the Holy Spirit। और यह पवित्र आत्मा का सबसे बड़ा कार्य है जो हमारे स्वभाव को, हमारे जीवन को परिवर्तित कर देता है।

पवित्र आत्मा का फल: परमेश्वर का प्रेम

जिसे हम परमेश्वर का प्रेम कहते हैं, वह पवित्र आत्मा का फल है जो परमेश्वर हर एक के जीवन में देखना चाहता है। यीशु मसीह ने कहा, "मैं दाखलता हूं, तुम डालियां हो"—अर्थात मेरा जीवन पवित्र आत्मा के द्वारा तुम्हारे अंदर फलना चाहिए। पवित्र आत्मा परमेश्वर की आज्ञा को मानने के लिए हमारी सहायता करता है, और सबसे बड़ी आज्ञा यह है कि हमें एक-दूसरे से प्रेम करना चाहिए।

यह सबसे महत्वपूर्ण कार्य था पवित्र आत्मा का जो यीशु मसीह के चेलों के जीवन में महत्वपूर्ण था। और आज हर वह व्यक्ति जो उनके चेलों के वचनों को सुनकर यीशु मसीह पर विश्वास करता है और विश्वासी कहलाता है, उनके जीवन में भी यह उसी प्रकार लागू होता है।

यीशु मसीह का स्वर्गारोहण और पवित्र आत्मा का आगमन

पवित्र आत्मा के विषय में यीशु मसीह जो चर्चा कर रहे हैं उसमें वह बता रहे हैं कि मैं विनती क्यों करूंगा। विनती इसलिए करूंगा क्योंकि मैं शरीर में स्वर्ग में चला जा रहा हूं। हाड़ और मांस में मैं परमेश्वर पिता के दाहिने हाथ एक महायाजक की सेवा करने जा रहा हूं ताकि मैं सारी मानवता को परमेश्वर पिता के सम्मुख प्रस्तुत कर सकूं।

आज सारी मानवता का प्रतिनिधित्व उस स्वर्गीय स्थान में परमेश्वर पिता के सामने यीशु मसीह हमारे लिए कर रहे हैं। लेकिन इस पृथ्वी पर जो लोग प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करते हैं, यीशु मसीह उनसे कहते हैं, "मैं तुम्हें अनाथ नहीं छोडूंगा, मैं तुम्हारे अंदर आकर रहूंगा।"

Christ the Hope of Glory Lives in Us

आज मसीह अर्थात जो अभिषिक्त है, परमेश्वर है, वह हमारे जीवन में कैसे रहता है? वह पवित्र आत्मा के द्वारा रहता है। वह महिमा जो परमेश्वर की आदम के जीवन से अलग हो गई थी, पवित्र आत्मा उसे मसीह की महिमा को फिर से हमारे अंदर पुनर्स्थापित कर देता है। अर्थात पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा हमारी आत्मा में आकर रहते हैं और हमारे साथ संगति करते हैं।

पवित्र आत्मा का आज के इस युग में बहुत महत्वपूर्ण कार्य है। यदि आप पवित्र आत्मा से भाग रहे हैं या पवित्र आत्मा से भय खा रहे हैं तो आप यीशु मसीह को नहीं जान सकते। बिना पवित्र आत्मा के हम यीशु मसीह के पास नहीं आ सकते क्योंकि पवित्र आत्मा परमेश्वर है जो हमारी आत्मा में आकर रहता है। He will dwell in you, He will be in you—"in you" means He will live, He will dwell in spirit। God is spirit and we are spirit beings, so Holy Spirit lives in spirit।

आत्मिक मनन

प्रभु यीशु मसीह ने अपनी मृत्यु से पहले अपने चेलों को बताया कि पवित्र आत्मा कितना महत्वपूर्ण है। क्या आज हमारे लिए पवित्र आत्मा की आवश्यकता नहीं है? उनसे भी अधिक हमें पवित्र आत्मा की आवश्यकता है, और यह पवित्र आत्मा उपलब्ध है। आज पवित्र आत्मा उंडेल दिया गया है और हर वह व्यक्ति जो यीशु मसीह पर विश्वास करता है, वह इसके योग्य है।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

यदि आप अपने जीवन में दुखी हैं, परेशान हैं, तो यीशु मसीह एक मार्ग है, सत्य है। यदि आप यीशु मसीह को अपने जीवन में उद्धारकर्ता और मुक्तिदाता के रूप में ग्रहण करेंगे तो वह पवित्र आत्मा आपकी सहायता करेगा। यदि आप बीमार और रोगी हैं तो प्रभु यीशु मसीह आपको भला चंगा करेंगे।

प्रभु यीशु मसीह के नाम में हम यह विश्वास रखते हैं कि प्रभु यीशु मसीह के नाम से हर एक बीमारी, रोग, हर एक श्राप, हर एक दुष्टता की आत्मिक सेना जो आपके विरोध में काम करती है—प्रभु यीशु मसीह के सामर्थी नाम से हटें। हम प्रार्थना करते हैं कि प्रभु यीशु मसीह के क्रूस का प्रकाशन आपके जीवन पर पड़े और आप उस उद्धार, मुक्ति और अनंतकाल के आनंद को पा सकें।